PM मोदी के भाषण पर चुनाव आयोग हुआ सख्त, जांच के लिए गठित की समिति

नई दिल्ली। ‘मिशन शक्ति’ को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के नाम संबोधन पर चुनाव आयोग ने सख्ती दिखाई है। आयोग ने इस संबोधन की जांच के लिए अधिकारियों की एक समिति का गठन का किया है। समिति को आयोग ने निर्देश दिया है कि आदर्श आचार संहिता के मद्देनजर मामले की तुरंत जांच होनी चाहिए। इस समिति के अध्यक्ष आदर्श आचार संहिता विभाग के प्रमुख उप चुनाव आयुक्त डॉक्टर संदीप सक्सेना होंगे।
मोदी के ट्वीट के बाद ही मच गई खलबली
दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार की दोपहर करीब साढ़े बारह बजे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से देश को संबोधित किया। इससे पहले उन्होंने खुद ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी थी कि वे एक महत्वपूर्ण संदेश देने वाले हैं। करीब एक घंटे तक देशभर के मीडिया में मोदी के ट्वीट का जिक्र होता रहा। मोदी ने करीब आठ मिनट तक देश को संबोधित किया। इसके बाद कई राजनीतिक पार्टियों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पीएम को इसकी घोषणा की इजाजत क्यों दी गई?
मिशन शक्ति: एंटी सैटेलाइट मिसाइल की लॉन्चिंग का पहला VIDEO

Election Commission: Matter related to address of the Prime Minister to the Nation on electronic media today afternoon has been brought to the notice of ECI.The Commission has directed a Committee of Officers to examine the matter immediately in the light of model code of conduct — ANI (@ANI) March 27, 2019

आयोग ने मांगी पीएम के भाषण की कॉपी
पीएम के संबोधन के बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की। वहीं पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए आयोग जाने की बात कही। शिकायत मिलने पर आयोग ने सख्त होते हुए प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की कॉपी मांगी है।
येचुरी ने अपनी शिकायत में क्या कहा?
येचुरी ने आयोग को लिखे पत्र में कहा है कि इस तरह का मिशन देश को डीआरडीओ बताता है, लेकिन इस बार प्रधानमंत्री ने इसे लेकर राष्ट्र को संबोधित किया। जबकि, पीएम मोदी खुद लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार हैं। ऐसे में आचार संहिता लागू होने के बाद उनको इसकी इजाजत कैसे दी जा सकती है? येचुरी ने आयोग से यह भी सवाल किया है कि क्या उन्हें इस संदेश के बारे में जानकारी थी? क्या चुनाव आयोग ने नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की इजाजत दी थी?