EXCLUSIVE: हिंदुत्व नहीं विकास पर लड़ रहे चुनाव: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

मुकेश केजरीवाल, नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच पत्रिका ने केंद्रीय रेल और कोयला मंत्री पीयुष गोयल से खास बातचीत की। गोयल पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में भी है। हमने ताजा राजनीतिक विवादों पर उनसे लंबी चर्चा की। पेश हैं संपादित अंश-
पत्रिका: दो चरण के मतदान के बाद आपके मुताबिक वो कौन से मुद्दे हैं, जिन पर लोग भाजपा को वोट दे रहे हैं?
हमने देश को सुशासन का अनुभव दिया। विकास को प्राथमिकता मिली और पूरे देश भर में कोने-कोने में आधारभूत सुविधाओं में सुधार हुआ। गरीबों के जीवन में खुशियां आईं। किसी को एलपीजी कनेक्शन मिला, कहीं पहली बार बिजली पहुंची। किसी को स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त में मिलने लगीं।
साथ ही देश सुरक्षित रखने वाला एक मजबूत नेतृत्व लोगों को दिखा। ऐसा नेतृत्व जो अर्थव्यवस्था ठीक रखे और साथ ही देश की सीमाओं को भी सुरक्षित रखते हुए आतंकवाद को मुहंतोड़ जवाब देने की क्षमता रखता हो। यानी समग्ररूप से सरकार का पांच साल का कार्यक्रम और आगे के पांच साल के संकल्प।
पत्रिका: लेकिन ऐन चुनाव के बीच पार्टी विकास पर हिंदुत्व को तरजीह तो नहीं देने लगी?
विकास तो कभी पीछे जा ही नहीं सकता। हम सभी प्रेरित हैं, गरीबों की सेवा करने। समाज के हर वर्ग तक विकास पहुंचाने।
पत्रिका: लेकिन अब प्रज्ञा ठाकुर को पार्टी में लेना, इतनी अहम सीट से लड़ाना और अब हेमंत करकरे पर बयान…
दिग्विजय सिंहजी ने झूठे आरोपों के आधार पर हिंदू आतंकवाद का जो प्रचार किया था, उसका कोर्ट ने पूरी तरह से पर्दाफाश कर दिया है। समाज को कलंकित करने की जो कोशिश हुई, उसका जवाब साध्वी प्रज्ञा ठाकुरजी भोपाल में देंगी। दिग्विजयजी को हरा कर पूरे विश्व को बता दिया जाएगा कि हिंदू आतंकवाद के नाम पर कांग्रेस ने कैसी ओछी राजनीति की।
पत्रिका: वे बीमारी के आधार पर जमानत पर बाहर हैं, उन पर आतंकवाद के संगीन आरोप हैं…
आरोप तो बेबुनियाद साबित होते जा रहे हैं। बेबुनियाद आरोप तो आप किसी पर भी लगा सकते हैं। वैसे तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी बेल पर हैं।
पत्रिका: जिस तरह के बयान इन दिनों आ रहे हैं। भाजपा के तो मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री भी ऐसी बात कह रहे हैं कि चुनाव आयोग को कार्रवाई करनी पड़ रही है।
कई बार कोई विषय आउट ऑफ कांटेक्स्ट ले लिया जाता है, कभी गलतफहमियां भी होती हैं और कई बार सामने से आजम खान जैसे बयान आते हैं तो उसमें उत्तेजना में व्यक्ति कुछ कह देता है। लेकिन साधारणतया भाजपा का मानना है कि चुनाव में शालीनता होनी चाहिए। मुद्दों पर लड़ा जाना चाहिए।
पत्रिका: आपके तो प्रदेश अध्यक्ष ने मंच से गंदी गाली दे दी। पार्टी कार्रवाई क्यों नहीं करती?
मुझे लगता है कि वह गलतफहमी थी। उस पर स्पष्टिकरण आ चुका है। वे खुद से उन शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहते थे, बल्कि किसी और ने जो शब्द इस्तेमाल किया था, उसी पर टिप्पणी की थी।
पत्रिका: फिर भी सार्वजनिक मंच से ऐसे शब्दों का इस्तेमाल तो अपने आप में ही बहुत गलत है।
सही बात है। हर व्यक्ति को अपना संतुलन रखना चाहिए।
पत्रिका: ऐसे अन्य मामलों में भी पार्टी अपनी ओर से कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?
जो जरूरी मामले होते हैं उन पर पार्टी कार्रवाई जरूर करती है।
पत्रिका: क्या पार्टी में इस लिहाज से सख्त संदेश दिया गया है?
बहुत ज्यादा तो ऐसे मामले हमारी पार्टी में हुए नहीं हैं। कभी किसी ने उत्तेजना में कुछ गलत कहा भी है तो उस पर भी हम सभी को संतुलन रखना चाहिए।
पत्रिका: भाजपा की ओर से प्रचार में सेना का इस्तेमाल किया जा रहा है…
2008 में जिस प्रकार का मुंबई पर हमला हुआ। तीन दिन तक आतंकवादी मुंबई के लोगों को मारते गए। इसी तरह 2010 में पुणे की जर्मन बेकरी पर हमला हुआ। कांग्रेस की महाराष्ट्र और केंद्र की सरकार बैठी रही। आखिर सेना के पास तब भी यह क्षमता थी कि पड़ोसी देश को जवाब दे सकती थी। मोदीजी के निर्णायक नेतृत्व के कारण ही आज आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देने में देश सक्षम है।
पत्रिका: लेकिन सेना तो देश के लिए लड़ती है। उसका राजनीतिक इस्तेमाल क्यों?
सेना के लिए निर्णय तो पोलिटिकल स्टेबलिशमेंट करता है। कांग्रेस के नेतृत्व ने यह फैसला क्यों नहीं किया। इन्होंने 55 साल राज किया। आज कश्मीर की समस्या खड़ी है तो उसकी जिम्मेवारी पूरी तरह कांग्रेस की है।
पत्रिका: चुनाव आयोग ने नमो टीवी पर बिना मंजूरी कुछ भी नहीं दिखाने को कहा। फिर भी वहां…
हमें कोई आपत्ति नहीं है। आयोग जो आदेश देगा उसका पालन करते हैं। हमें कुछ ऐतराज होता भी है तो औपचारिक प्रक्रिया के जरिए अपनी बात रखते हैं।
पत्रिका: एलेक्टोरल बांड सरकार यह कह कर लाई कि पारदर्शिता आएगी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में कहा कि जनता को यह जानने का क्या हक है कि चंदा किसने दिया।
कई वर्षों से यह बहस चल रही है। बहुत से लोग राजनीतिक प्रक्रिया में जुड़ना चाहते हैं, लेकिन उन्हें भय होता है कि दूसरी पार्टियां उसे परेशान कर सकती हैं। इसलिए हमने यह तरीका निकाला कि ईमानदार पैसा बैंक के जरिए खरीदे गए एलेक्टोरल बांड से राजनीतिक प्रक्रिया में आए। बैंक चंदा देने वाले का पूरा ब्योरा रखता है। ईमानदार पैसा देश की राजनीति को चलाए, यह इसकी पहल है।
मैं आरोप लगाऊंगा कि विपक्ष के राजनेता पार्टियों के लिए चंदा कम इकट्ठा करते हैं, खुद की जेब में डालने के लिए ज्यादा इकट्ठा करते हैं। इसलिए वे नहीं चाहते कि ईमानदार पैसा राजनीति में आए। हम चाहते हैं कि ईमानदार पैसा आए, बैंक से आए। लोग डरें नहीं इसलिए उनकी पहचान बाहर लाने की आवश्यकता नहीं है।
पत्रिका: लेकिन आयोग ने कहा है कि बांड पारदर्शिता के खिलाफ है?
शायद उनको समझने में कुछ दिक्कत हुई होगी।
पत्रिका: राजस्थान में 2014 में आप शीर्ष पर थे। मगर उसके बाद से लगातार…
विधानसभा में हमें थोड़ी कम सीटें मिलीं। लेकिन जहां तक प्रधानमंत्री मोदीजी को चुनने की बात है, वहां के लोग भी शत-प्रतिशत मोदीजी के काम से संतुष्ट हैं। उनको फिर से प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं और हमारा विश्वास है कि 25 की 25 सीटें भाजपा जीतेगी।
पत्रिका: भाजपा के संस्थापक नेता, आडवाणी, जोशी, सुमित्रा महाजन ये सब असंतुष्ट हैं…
किसने कहा है कि आडवाणीजी या जोशीजी संतुष्ट नहीं हैं?
पत्रिका: जोशीजी ने बकायदा संदेश जारी किया कि उन्हें चुनाव लड़ने से मना किया गया है।
यह तो हम सभी मानते ही हैं कि राष्ट्र सबसे पहले, फिर पार्टी, फिर हम। देश की खातिर हम सभी काम में जुटे हैं। पार्टी जो निर्णय लेती है, हमें सर्वमान्य होता है। वाजपेयीजी ने कहा था कि पद तो आएंगे, जाएंगे। मगर मैं भाजपा कार्यकर्ता था, हूं और रहूंगा। नानाजी देशमुख 65 साल की उम्र में सक्रिय राजनीति से रिटायर हो गए।
पत्रिका: सुमित्रा महाजन ने भी चिट्ठी लिखी। कहीं संवाद में कमी रह जाती है क्या?
उनको लगा होगा कि नए लोगों को मौका मिले। मेरी मां ने भी ऐसा खुद ही कहा था कि अब मुझे नहीं लड़ना है।
पत्रिका: आपके घोषणापत्र में राज जन्मभूमि और धारा 370 जैसे मुद्दे हैं जो 2014 में भी थे।
हमारे पास राज्य सभा में पूर्ण बहुमत नहीं था।
पत्रिका: आप रेल मंत्री हैं, 14 में कहा था बुलेट ट्रेन लाएंगे। काम कब तक शुरू होगा?
अलग-अलग पहुलओं पर काम चल रहे हैं। जापान से ले कर मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद आदि जगहों पर काम चल रहे हैं। अधिकारियों की ट्रेनिंग हो रही है जापान और वडोदरा में। मुंबई में जमीन मिल गई है। डिजाइनिंग चल रही है।बहुत कांप्लीकेटेड डिजाइन होता है इसका। फिर टेंडरिंग प्रक्रिया है। वित्तीय प्रक्रिया है, जमीन का अधिग्रहण है। कई सारी चीजें समय सीमा के हिसाब से चल रही हैं। 2023 के अंत तक काम शुरू होने की संभावना है।
पत्रिका: आपने कहा था कि हर रेल यात्री को कंफर्म्ड टिकट मिलेगा…
यह कभी किसी ने नहीं कहा। यह मीडिया का बनाया हुआ डायलॉग है। भारतीय रेल में पिछले 50-60 वर्षों में मात्रा 30 प्रतिशत इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा है और 1500 प्रतिशत यात्री और माल ढोने का काम बढ़ा है। ऐसी परिस्थिति में स्वभाविक है कि रेलवे जर्जर हाल में होगी। कांग्रेस ने कभी निवेश ही नहीं किया। कांग्रेस जिम्मेदार है निवेश नहीं करने की। हमने सभी स्टेशनों को स्वच्छता में शानदार किया। 167 साल के इतिहास में पिछले दो साल सबसे सुरक्षित साल रहे। लाइन रिपेयर का कोई बैकलॉग अब नहीं है।
पत्रिका: आपका रोजगार देने का वादा था। उसकी बजाय एयरलाइंस बंद हो रही है और लोग बेरोजगार हो रहे हैं?
हमने कहा था कि तेज विकास करेंगे और उसमें बहुत सारे लोगों को काम मिलेगा। जिस बड़े पैमाने पर पिछले पांच साल में काम और रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं शायद ही पहले इतना काम हुआ होगा। आखिर जब इतना विकास होता है, सड़कें बनती हैं, रेलवे में ढाई गुना निवेश होता है, नए एयरपोर्ट बनते हैं। 10-12 करोड़ शौचालय बने, घर-घर तक बिजली पहुंची, एलपीजी कनेक्शन दुगने हो गए तो इन विकास के काम से नए रोजगार के अवसर आते हैं। लेकिन जो आंकड़े तैयार करने का पुराना तरीका है, इसे समझ नहीं पा रहा है। जैसे लाखों लोग उबर और ओला की टैक्सियां चलाते हैं तो वह आंकड़ों में तो आता नहीं।Indian Politics से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Follow करें Twitter पर ..