वोटिंग स्लिप पर आयोग ने कराया अध्ययन, मगर फिलहाल गिनती बढ़ाने की संभावना नहीं

नई दिल्ली। चुनाव के दौरान एलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वीवीपैट से निकलने वाली पर्ची के मिलान का औसत बढ़ाने की विपक्ष की मांग पर फिलहाल कोई कार्यवाही होने की उम्मीद नहीं। शुक्रवार को भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आइएसआइ) ने इस संबंध में अपनी अध्ययन रिपोर्ट केंद्रीय चुनाव आयोग को सौंप दी है।
रिपोर्ट में क्या कहा गया है, इसको ले कर फिलहाल आयोग ने कुछ नहीं कहा है, लेकिन माना जा रहा है कि आइएसआइ की रिपोर्ट में चुनाव आयोग की मौजूदा व्यवस्था को ले कर संतोष जताया गया है। आयोग के एक अधिकारी कहते हैं कि इस बार के चुनाव में तो कोई बदलाव नहीं है। इस संबंध में विपक्ष की डेढ़ दर्जन से ज्यादा पार्टियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की गई है कि ईवीएम की गिनती का कम से कम 20 प्रतिशत पर्चियों से मिलान किया जाए। इसके बाद ही नतीजे घोषित किए जाएं। इस पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया जा चुका है।
अगले लोकसभा चुनाव में देश के हर बूथ पर वीवीपैट यानी वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल मशीनें लगी होंगी। इसमें लगे प्रिंटर की मदद से एक पर्ची निकलेगी जिसमें मतदाता देख सकेगा कि उसने जिस पार्टी को वोट डाला था, उसका चिह्न है या नहीं। लेकिन मतगणना के दौरान हर सीट पर सिर्फ एक मतदान केंद्र में ही पर्चियों की गिनती की जाएगी।
आइएसआइ के सूत्रों के मुताबिक इतनी संख्या में पर्चियों का मिलान वैज्ञानिक और सांख्यिकीय दृष्टि से पर्याप्त है। इसे बढ़ाने की जरूरत नहीं है।