वाराणसी में ‘नमो’ के खिलाफ प्रियंका बन सकती है कांग्रेस की ‘ढाल’, तैयार किया जा रहा है चुनावी ‘ब्लू प्रिंट’!

नई दिल्ली। देश में लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां अपने शबाब पर है। पहले चरण का मतदान खत्म हो चुका है और अन्य चरणों के लिए सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। दिल्ली की कुर्सी पर आसीन होने के लिए पार्टियां अलग-अलग समीकरण बनाने में जुटी हैं। खासकर, यह चुनाव कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए नाक की लड़ाई बना हुआ है। ऐसे में अफवाह यह है कि वारणासी लोकसभा सीट से प्रधानमंत्री नेरन्द्र मोदी को टक्कर देने के लिए कांग्रेस प्रियंका गांधी को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।
 प्रियंका गांधी को लेकर अटकलें तेज
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी लगातार प्रिंयका गांधी को चुनाव लड़वाने के बारे में विचार-विमर्श कर रही हैं। पार्टी के थिंक टैंकर वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ प्रियंका गांधी को उतारने की सोच रहे हैं। इसके लिए चुनावी ‘ब्लू प्रिंट’ भी तैयार किया जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि वाराणसी सीट से नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन कांग्रेस पार्टी प्रियंका के नाम की घोषणा कर सकती है। वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि प्रियंका को वाराणसी से चुनाव लड़वाने का आखिरी फैसला सोनिया गांधी लेंगी। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक कुछ नहीं कहा गया है।
 प्रियंका गांधी VS पीएम मोदी की लड़ाई?
यहां आपको बता दें कि प्रचार-प्रसार के दौरान प्रियंका गांधी ने जब वाराणसी और अयोध्या का दौरा किया था, उसी वक्त कार्यकर्ताओं ने उनसे सवाल किया था कि क्या वह वाराणसी से चुनाव लड़ेंगी? प्रियंका गांधी ने खुलकर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन मुस्कुराते हुए हमेशा बोलीं कि पार्टी जहां से चाहेगी वहां से वह चुनाव लड़ेंगी। इसके बाद से ही मामले ने तूल पकड़ा और प्रियंका गांधी का वाराणसी से चुनाव लड़ने की चर्चाएं शुरू हो गई? गौरतलब है कि कांग्रेस महासचिव बनाए जाने के बाद प्रियंका गांधी को पार्टी ने पूर्वी यूपी की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद से प्रियंका लगातार यूपी में सभाएं, रोड शो और रैलियां कर रही हैं। अब सबकी निगाहें कांग्रेस हाईकमान और सोनिया गांधी के इस फैसले पर टिकी है कि क्या सच में प्रियंका, पीएम मोदी को वाराणसी से टक्कर देंगी या फिर चुनावी हवाओं की तरह यह भी केवल चर्चाओं तक सीमित रह जाएगी?