लोकसभा चुनाव 2019: महिला नेतृत्व के लिहाज से मध्यप्रदेश भाजपा फिलहाल सूनी

आलोक पण्ड्या
भोपाल. मध्यप्रदेश में भाजपा अब महिला नेतृत्व के लिहाज से निर्वात जैसी स्थिति में आ गई है। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के चुनाव नहीं लडऩे के ऐलान के साथ ही अब प्रदेश की तीन दिग्गज महिला नेत्री इस चुनाव में प्रत्याशी के तौर पर नजर नहीं आएंगी।
इनमें ताई के नाम से मशहूर सुमित्रा के अलावा केन्द्रीय मंत्री और प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं उमा भारती और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज शामिल हैं। सुषमा और उमा पहले ही 2019 का चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा चुकी थीं। अब ऐसा कोई नाम फिलहाल नहीं दिख रहा, जो इन तीनों के कद तक जाकर प्रदेश की राजनीति में आए और इस खालीपन को भर सके। हालांकि तीनों ने कहा है कि वे सक्रिय रहकर भाजपा के लिए चुनाव प्रचार जरूर करेंगी।
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संघ ने मनाया, तब मानीं ताई: सुमित्रा महाजन इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगी, इसका निर्णय 23 मार्च को दिल्ली में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में ही हो गया था। लेकिन महाजन ने खुद इसकी घोषणा करने से इनकार कर दिया।
सूत्रों ने बताया कि वे इंदौर में जनसंपर्क करने लगीं तो भाजपा नेतृत्व चिंतित हुआ और संघ सहकार्यवाह भय्याजी जोशी को भेजा गया। उन्होंने इंदौर जाकर महाजन को चुनाव न लड़ने के लिए मनाया। तब जाकर महाजन ने चिट्‌ठी जारी की।
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दस साल से रहा एमपी की सियासत में दखल
सुषमा स्वराज: सुषमा स्वराज का घर मध्य प्रदेश में नहीं रहा हो, लेकिन वह यहां की विदिशा सीट से दो बार सांसद रहीं। पिछले दस वर्षों से सुषमा का दखल प्रदेश की राजनीति में रहा है। सुषमा के विदिशा सीट छोड़ने के बाद वहां भाजपा को अपना उम्मीदवार खड़ा करने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
परिवार की पॉलिटिक्स: सुषमा की बहन वंदना शर्मा का नाम भी विदिशा सीट से चर्चा में आया था, जिस पर सुषमा ने स्वयं ही इनकार कर दिया।
टिकट अब किसका: विदिशा का टिकट फाइनल नहीं हुआ है। प्रत्याशी पर चर्चा के लिए सुषमा ने स्थानीय विधायकों और नेताओं को बुलाया था। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की पत्नी साधना सिंह का नाम आगे बढ़ाया गया। सुषमा की बहन वंदना का नाम भी आगे बढ़ाया गया।
इंदौर सीट बनाई अजेय गढ़
सुमित्रा महाजन: 1982 में राजनीति में आईं और 1989 में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाशचंद सेठी को हरा कर पहली बार सांसद बनीं। इसके बाद उन्होंने इंदौर को भाजपा के अजेय गढ़ बना दिया। लगातार इस सीट पर आठ बार जीती हैं।
परिवार की पॉलिटिक्स: ताई की विरासत दो पुत्र मंदार और मिलिंद संभाल रहे हैं। हालांकि विस चुनाव में मंदार को टिकट नहीं मिला।
टिकट अब किसका: इन्दौर सीट पर प्रमुख तौर पर इन्दौर मेयर मालिनी गौड़ और आईडीए अध्यक्ष शंकर ललवानी का नाम प्रमुख है।
हमेशा बनाए रखी फायरब्रांड नेता की छवि
उमा भारती: उमा 2014 में भले ही झांसी से सांसद चुनी गई हों, लेकिन मध्यप्रदेश की राजनीति का वे अहम हिस्सा हैं। 2003 में दिग्विज सिंह सरकार को उखाड़कर मुख्यमंत्री बनीं, उमा इसी प्रदेश से पांच बार लोकसभा पहुंची।
परिवार की पॉलिटिक्स: उमा भारती के भतीजे राहुल लोधी इस समय विधायक हैं। लोधी विधानसभा चुनाव में टीकमगढ़ जिले की खडगपुर सीट से चुनाव जीते हैं।
शैली है तीनों की पहचान: ये तीनों महिला नेत्रियां भाषण शैली के कारण अपनी अलग पहचान रखती हैं। उमा अपनी फायरब्रांड शैली के चलते चर्चित हैं, तो सुषमा के भाषण तर्कों पर आधारित होते हैं। सुमित्रा विनम्र और स्नेह भरे भाषण से लोगों से जुड़ाव बनाती हैं।