लालू प्रसाद ने नीतीश को बताया छोटा भाई, ’11 करोड़ गरीब जनता की पीठ में घोंपा विश्वासघाती तीर’

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सात में से छठे चरण का मतदान संपन्न हो चुका है। इसके साथ ही देशभर की कुल 89 प्रतिशत सीटों पर रविवार को मतदान पूरा हो गया है, और सातवें और अंतिम चरण के मतदान में अब एक हफ्ते से भी कम का वक्त बचा हुआ है। इस चुनावी माहौल में देश की छोटी-बड़ी हर पार्टियां, रैलियों-जनसभाओं में एक-दूसरे पर निशाना साध रही है। साथ ही मीडिया के साथ बातचीत और साक्षात्कारों में भी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। आखिरी चरण की आखिरी लड़ाई में यह और तेज होने लगा है। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद (Lalu Prasad Yadav), जेल से ही पूरी चुनावी हलचल के बीच अपनी सक्रियता दर्ज करा रहे हैं, ने सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री औरे जनता दल -युनाइटेड (JD-U) प्रमुख नीतीश कुमार को पत्र लिखकर उन पर निशाना साधा है।
सुनो छोटे भाई नीतीश…: लालू प्रसाद
लालू ने इस पत्र में RJD के चुनाव चिह्न ‘लालटेन’ को अंधेरा हटाने वाला जबकि जद-यू के ‘तीर’ को हिंसा का पर्याय बताया। अपने फेसबुक पोस्ट और ट्विटर पर शेयर किए इस पत्र में लालू प्रसाद ने पत्र में नीतिश को छोटा भाई बताते हुए लिखा, ‘सुनो छोटे भाई नीतीश, ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तुम्हें आजकल उजालों से कुछ ज्यादा ही नफरत हो गई है। दिनभर लालू और उसकी लौ लालटेन-लालटेन का जाप करते रहते हो। तुम्हें पता है कि नहीं, लालटेन प्रकाश और रोशनी का पर्याय है। मोहब्बत और भाईचारे का प्रतीक है। गरीबों के जीवन से तिमिर (अंधेरा) हटाने का उपकरण है। हमने लालटेन के प्रकाश से गैरबराबरी, नफरत, अत्याचार और अन्याय का अंधेरा दूर भगाया है और भगाते रहेंगे। तुम्हारा चिह्न ‘तीर’ तो हिंसा फैलाने वाला हथियार है। मार-काट व हिंसा का पर्याय और प्रतीक है।’

सुनो छोटे भाई नीतीश, ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तुम्हें आजकल उजालों से कुछ ज़्यादा ही नफ़रत सी हो गयी है। दिनभर लालू और उसकी लौ लालटेन-लालटेन का जाप करते रहते हो। तुम्हें पता है कि नहीं, लालटेन प्रकाश और रोशनी का पर्याय है। मोहब्बत और..https://t.co/odjDnNbjGm— lalu prasad yadav (@laluprasadrjd) May 13, 2019

‘डरकर शॉर्टकट ढूंढना और अवसर देख समझौते करना पुरानी आदत’
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पत्र में आगे लिखा, ‘जनता को लालटेन की जरूरत हर परिस्थिति में होती है। प्रकाश तो दिए का भी होता है। लालटेन का भी होता है, और बल्ब का भी होता है। बल्ब की रोशनी से तुम बेरोजगारी, उत्पीड़न, घृणा, अत्याचार, अन्याय और असमानता का अंधेरा नहीं हटा सकते। इसके लिए मोहब्बत के साथ खुले दिल और दिमाग से दिया जलाना होता है। समानता, शांति, प्रेम और न्याय दिलाने के लिए खुद को दिया और बाती बनाना पड़ता है।’ लालू ने कहा, ‘समझौतों को दरकिनार कर जातिवादी, मनुवादी और नफरती आंधियों से उलझते और जूझते हुए खुद को निरंतर जलाए रहना पड़ता है। तुम क्या जानो इन सब वैचारिक और सैद्घांतिक उसूलों को। डरकर शॉर्टकट ढूंढना और अवसर देख समझौते करना तुम्हारी बहुत पुरानी आदत रही है।’
11 करोड़ गरीब जनता की पीठ पर विश्वासघाती तीर
लालू ने आगे लिखा, ‘यह जमाना मिसाइल का है, तीर का जमाना लद गया है। तीर अब संग्रहालय में दिखेगा। लालटेन हर जगह जलता दिखेगा। पहले से अधिक जलता हुआ मिलेगा क्योंकि 11 करोड़ गरीब जनता की पीठ में तुमने विश्वासघाती तीर ही ऐसे घोंपे हैं। बाकी तुम अब कीचड़ वाले फूल में तीर घोंपो या छुपाओ, तुम्हारी मर्जी।’ आपको याद दिला दें कि लालू प्रसाद इन दिनों चारा घोटाले के कई मामलों में रांची की एक जेल में सजा काट रहे हैं। स्वास्थ्य कारणों से वे रांची के एक अस्पताल में भर्ती हैं। लालू प्रसाद के पुत्र और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद ने रविवार को बिहारवासियों को एक पत्र लिखकर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा था।