राम मंदिर मुद्दे पर बोले पीएम मोदी, हमारा स्टैंड शुरू से स्पष्ट है

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के चार चरण संपन्न हो चुके हैं और सोमवार को पांचवें चरण का मतदान होना है। इससे पहले पीएम मोदी (PM Modi) ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। राम मन्दिर निर्माण, धारा 370, कॉमन सिविल कोड, महिला आरक्षण, तीन तलाक और आर्थिक आधार पर आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार एक कदम आगे और दो कदम पीछे चलती नजर आई, लेकिन फाइनल रिजल्ट कुछ खास नहीं निकला। इन पर पीएम मोदी ने कहा कि उनका स्टैंड शुरू से स्पष्ट है।
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पत्रिका से खास बातचीत में इन मुद्दों पर पीएम मोदी ने कहा, “आपने कई विषयों को एक साथ जोड़कर खिचड़ी बना दी है। आपने कहा आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात उठाई। कहां हमने एक कदम आगे और दो कदम पीछे किया। बल्कि हमें इस बात का गर्व है कि हमने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भी संबल देने का काम किया। वो भी एससी, एसटी और ओबीसी को मिले आरक्षण को छेड़े बिना। हमने आर्थिक आरक्षण देने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया। ये पहली बार हुआ है कि इतने संवेदनशील विषय पर फैसला हो गया बिना सामाजिक समरसता बिगाड़े हुए।”तीन तलाक को लेकर पीएम मोदी बोले, “आपने तीन तलाक का सवाल उठाया। मेरा यही कहना है कि आपको ये सवाल उन विपक्षी पार्टियों से पूछना चाहिए, जो इस सदियों पुरानी, महिलाओं के खिलाफ चली आ रही कुप्रथा का समर्थन कर रहे हैं। इसे धर्म के चश्मे से देखने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा कमिटमेंट एकदम साफ है। इस कुप्रथा को हर हाल में खत्म करना ही होगा।”
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वहीं, हिंदुओं की आस्था से जुड़े और भाजपा के एजेंडे में काफी लंबे वक्त से शामिल अयोध्या विवाद को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “राम मंदिर पर तो हमारा स्टैंड शुरू से स्पष्ट है। अड़ंगे कौन लटका रहा है? सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर की सुनवाई को लटकाने कौन गया था? इसी प्रकार बाकी विषयों को लेकर भी भाजपा का स्टैंड स्पष्ट है। संविधान ने इन्हें लागू करने के जो भी रास्ते निर्धारित किए हैं, हम उसी रास्ते पर चलेंगे।”
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शिक्षा में भारतीय संस्कृति का हिस्सा बढ़ाने की जरूरत पर पीएम ने प्रतिक्रिया दी, “मेरा साफ मानना है कि संस्कृति के बिना शिक्षा अधूरी है। भारत की सदियों पुरानी परंपरा, सभ्यता और संस्कृति हमारा आधार है। इनका जितना संबंध शिक्षा से है, उतना ही गहरा जुड़ाव हमारे व्यावहारिक जीवन से भी है। शिक्षा व्यवस्था पर हमारी सरकार विशेष ध्यान दे रही है।”
उन्होंने शिक्षकों की जरूरत पर भी बल देते हुए कहा, “हमारा जोर शिक्षा में विश्वस्तरीय गुणवत्ता हासिल करने पर है। हमें संस्कृति और विज्ञान दोनों को साथ लेकर चलना होगा। हम पाठ्यक्रम को अपग्रेड करेंगे। शिक्षकों के खाली पद भरेंगे, रिसर्च पर हमारा जोर रहेगा। साथ ही शिक्षा को इंडस्ट्री के साथ जोड़ा जाएगा। वर्कफोर्स को शिक्षित और स्किल्ड बनाए बिना 8-10 प्रतिशत की ग्रोथ रेट टिकाऊ नहीं हो सकती।”
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