रमजान में एक महीना नहीं टाल सकते चुनाव, जुमे और त्योहार का रखा ध्यान: चुनाव आयोग

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। राजनेता अपने अपने हिसाब से सियासत पहले भी करते थे और अब भी कर रहे हैं, लेकिन इसबार सियासत हो रही 17वीं लोकसभा चुनाव के दौरान पड़ने वाले रमजान पर। कई मुस्लिम नेताओं और मौलानाओं ने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने इन तारीखों में बदलाव की मांग की है। जिसके बाद चुनाव आयोग ने इस पूरे मामले पर सफाई दी है।
चुनावी तारीख तय करते समय रखा सभी का ध्यान: आयोग
चुनाव आयोग ने कहा है कि रमजान पूरे महीने चलता है, ऐसे में चुनाव नहीं टाले जा सकते थे। चुनाव की तारीखों का चयन करते समय हमने त्योहार और जुमे का ध्यान रखा है। चुनावी कार्यक्रम इस तरह से तैयार किया गया है कि किसी को इससे असुविधा न हो।
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Election Commission: During #Ramadan, polls are conducted as full month can not be excluded. However, date of main festival and Fridays are avoided for poll days. #LokSabhaElections2019 pic.twitter.com/i6NylD6WVB— ANI (@ANI) March 11, 2019

रमजान में ज्यादा होगी वोटिंग: ओवैसी
ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रमजान में मतदान को लेकर हो रही सियासत पर ऐतराज जताया है। ओवैसी ने कहा कि कुछ लोग इस बात को लेकर बेवजह विवाद पैदा कर रहे हैं। चुनाव एक बड़ी प्रक्रिया है, विवाद करने वाले मुस्लिमों को नहीं समझते। एक मुसलमान होने के नाते वो रमजान में चुनाव तारीखों का स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि मैं रमजान में रोजा रखूंगा और वोट डालूंगा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि रमजान में मुसलमानों का वोट प्रतिशत बढ़ेगा।
क्या है विवाद की वजह
बता दें कि रविवार को लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही इसपर राजनीतिक शुरू हो गई। टीएमसी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत कुछ विपक्षी दलों ने रमजान माह में चुनाव होने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि इससे चुनाव नतीजे प्रभावित होंगे। इसका बड़ा कारण देश की कुल 543 में से 169 लोकसभा सीटों पर रमजान के दौरान मतदान कराना है। रमजान के दौरान मतदान वाले राज्यों के अधिकांश उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली की सीटें हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के मौलानाओं ने ऐतराज जताते हुए आयोग से चुनावी तिथियों में फेरबदल करने की मांग की है।