रफाल पर अटॉर्नी जनरल ने लिया यू-टर्न तो चिदंबरम बोले, लगता है चोरों ने दस्तावेज वापस कर दिए

नई दिल्ली। रफाल विमान सौदे पर हर रोज नई नई राजनीति हो रही है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के यू-टर्न पर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि शनिवार को कहा गया कि लगता है चोर ने चोरी किए दस्तावेज वापस लौटा दिए हैं। दरअसल वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में दी गई दस्तावेजों के ‘रक्षा मंत्रालय से चोरी होने’ की दलील शुक्रवार को यू-टर्न ले लिया है।
चिदंबरम ने ट्विटर पर लिखा….
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने तंज भरे अंदाज में ट्विटर पर लिखा कि बुधवार के दिन अखबार को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम का हवाला दिया गया। शुक्रवार को ऑलिव ब्रांचेज एक्ट दिखाया गया। हम इस समझ को सलाम करते हैं। …बुधवार को उन्हें ‘चुराए गए दस्तावेज’ कहा गया। शुक्रवर को ‘फोटो कॉपी किए गए दस्तावेज’ कहा गया। मुझे लगता है कि इस बीच गुरुवार को चोर ने दस्तावेज वापस कर दिए।
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On Wednesday, it was ‘stolen documents’. On Friday, it was ‘photo copied documents’. I suppose the thief returned the documents in between on Thursday.— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) March 9, 2019

तीसरे दिन वेणुगोपाल बोले- मेरा वो मतलब नहीं था
सुप्रीम कोर्ट में रफाल सौदे के दस्तावेज चोरी होने की दलील देने के तीसरे दिन अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा है कि रफाल सौदे से जुड़े अहम दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी नहीं हुए, बल्कि लीक हुए हैं। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि ‘सुप्रीम कोर्ट में मैंने जो कहा था, उसका मतलब यह नहीं था कि दस्तावेज चोरी हुए हैं। दरअसल मैं यह कहना चाहता था कि याचिकाकर्ताओं ने दस्तावेजों की फोटो कॉपियों का इस्तेमाल किया था जबकि यह दस्तावेज बेहद गोपनीय थे।
पहले क्या खबर आई?
बुधवार को मीडिया में खबर आई कि अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 36 रफाल लड़ाकू विमानों की खरीद संबंधित अति महत्वपूर्ण दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी हो गए हैं। कोर्ट में पुनर्विचार याचिकाएं भी इसी आधार पर दाखिल हुई हैं, इसलिए ये खारिज होनी चाहिए। इसपर कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से पूछा था कि क्या रफाल से जुड़े जो दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी हुए हैं, उससे संबंध में मंत्रालय प्रमुख हलफनामा दे सकता है? जिससे पता चले कि चोरी दस्तावजों का इस्तेमाल ही न्यूज पेपर और न्यूज एजेंसी ने किए हैं। इस पर वेणुगोपाल ने सहमति जता दी थी।