भाजपा में वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय राजनीति से होगी ‘छुट्टी’ ! इनके कट सकते हैं टिकट

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में एक महीने से भी कम समय बचा है। कई दलों ने अपने-अपने पत्ते खोल दे दिए हैं। कांग्रेस, बसपा, सपा लेफ्ट समेत करीब-करीब सभी दलों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। लेकिन भाजपा की ओर से अभी तक प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं की गई है। प्रत्याशियों को सियासी मैदान में उतराने को लेकर भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक कई बार हो चुकी है । लेकिन अभी तक उम्मीदवारों के नामों पर सहमति नहीं बन पाई है। वहीं सूत्रों के हवाले से ये भी खबर आ रही है कि भाजपा इस बार कई सांसदों का टिकट काट सकती है। इसमें भाजपा के वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कलराज मिश्रा, उमा भारती, परेश रावल समेत कई दिग्गज नेताओं को चुनाव से वंचित रखा जा सकता है। सूत्रों के अनुसार हिंदी हाट लैंड में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद शीर्ष नेतृत्व 60 फीसदी से ज्यादा सांसदों को टिकट नहीं देने के मूड में है।
छत्तीसगढ़ के सांसदों का कटेगा टिकट
छत्तीसगढ़ में तो पार्टी ने सभी सांसदों को टिकट नहीं देने की घोषणा की है। पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 में से 72 सीटें हासिल करने वाली पार्टी इस बार दो दर्जन सांसदों के टिकट काटने के संकेत दे रही है। हालांकि पार्टी ने पीएम मोदी, राजनाथ सिंह समेत 28 सीटों पर पुराने प्रत्याशियों को उतारने का ही फैसला किया है।
मुरली मनोहर जोशी को राज्यपाल बनाने की चर्चा
भाजपा के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक फिलहाल आडवाणी व जोशी के भविष्य पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। लेकिन शीर्ष स्तर पर इनकी भावी भूमिका को लेकर मंथन चल रहा है। यहां तक कि मुरली मनोहर जोशी को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से चुनाव के बाद राज्यपाल बनाने का संकेत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी वरिष्ठ नेताओं की उम्र ज्यादा होने के कारण सक्रिय राजनीति से दूर रखना चाहती है। पार्टी इन्हें बाहर से मार्गदर्शन करने का आग्रह कर रही है। बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद ही इन वरिष्ठ नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया गया था।