भाजपा केंद्रीय नेतृत्व सख्त, कहा- रमन सिंह, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह लड़ें चुनाव या सन्यास ले लें

नई दिल्ली। आम चुनाव के लिए रणभेरी बज चुकी है और राजनीतिक दलों के बीच सियासी जंग भी शुरू हो गया है। इतना ही नहीं अपना या अपने किसी रिश्तेदार का टिकट पक्का करने के लिए राजनेताओं में भी संघर्ष जारी है। इसी कड़ी में यह संग्राम छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल रहा है। दरअसल छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने लोकसभा चुनाव न लड़ने की इच्छा जाहिर की है, लेकिन वे चाहते हैं कि उनके बेटे को टिकट दिया जाए। भाजपा आलाकमान ने साफ कर दिया है कि यदि वे चाहें तो चुनाव लड़ें या फिर राजनीति से सन्यास ले लें, बेटे को टिकट नहीं दिया जाएगा। अब इस तरह के फरमान सामने आने के बाद से रमन सिंह असमंजस में हैं। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि आखिर वे इस परिस्थिति में करें तो क्या करें? बताया जा रहा है कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि यही फॉर्मूला राजस्थान में वसुंधरा राजे और मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के लिए भी लागू है, जिसे सभी को मानना होगा। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के इस सख्त रवैये से चिंतित तीनों नेताओं ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के सामने गुहार लगाई है। अब देखना होगा कि क्या भाजपा केंद्रीय नेतृत्व अपने फैसले पर पुनर्विचार करती है या फिर कायम रहती है।भाजपा के इस नेता ने थामा कांग्रेस का हाथ, सीएम कमलनाथ सीटों को लेकर कर रहें मथन
सुषमा स्वराज नहीं लड़ेंगी चुनाव
आपको बता दें कि इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी यह ऐलान किया था कि वह आगामी लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगी। फिलहाल सुषमा स्वराज मध्यप्रदेश की विदिशा से सांसद हैं। इसके अलावा लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने भी चुनाव न लड़ने की घोषणा की थी। अब टिकट बंटवारे के समय भाजपा आलाकमान के लिए जरुर मुश्किलें खड़ी हो सकती है। जहां एक ओर रमन सिंह, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह के किसी भी रिश्तेदार को टिकट न देने की बात भाजपा आलाकमान की ओर से कही जा रही है, वहीं दूसरी और क्या सुषमा स्वराज या फिर सुमित्रा महाजन के लिए भी यही फॉर्मूला लागू होगा? यदि ऐसा नहीं होता हो तो फिर भाजपा केंद्रीय नेतृत्व को अपने ही नेताओं की नाराजगी मोल लेनी पड़ेगी, जिसका खामियाजा चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। बता दें कि संभवतः तीनों राज्यों के विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भाजपा नेतृत्व ने इस तरह के फैसले लिए हो।
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टिकट पाने के लिए नेताओं में संघर्ष
आपको बता दें कि चुनाव होने में अब एक महीने से भी कम समय बचा हुआ है और भाजपा ने अभी तक टिकट बंटवारे की घोषणा नहीं की है। लिहाजा हर राज्य में पार्टी के कार्यकर्ता और नेता अपना या फिर अपने रिश्तेदारों व परिवारों के लिए टिकट पक्का करने की कोशिश में जुट गए हैं। बता दें कि यह कोशिश केवल भाजपा में ही नहीं बल्कि हर पार्टी में दिखाई दे रहा है। बहरहाल टिकटों के वितरण का फैसला पार्टी के आलाकमान ही करते हैं। इससे पहले कांग्रेस पहेल ही कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवरों की घोषणा कर चुकी है जबकि तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल की सभी 42 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है।
 
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