बनारस में बोले PM मोदी- मैं देशहित के अलावा किसी का हित नहीं सोचूंगा, राष्ट्र प्रथम

नई दिल्ली। वाराणसी में मेगा शो और दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सभा को भी संबोधित किया। मोदी ने कहा कि 5 वर्ष पहले जब काशी की धरती पर मैंने कदम रखा, तब मैंने कहा था कि मां गंगा ने मुझे बुलाया है। मैया ने ऐसा दुलार दिया, काशी के बहन-भाइयों ने इतना प्यार दिया कि बनारस के फक्कड़पन में ये फकीर भी रम गया।
– चाहे कुछ भी हो जाए, मैं देशहित के अलावा किसी और का हित नहीं सोचूंगा। चाहे वो पुलवामा का संकट हो, उरी की घटना हो या फिर मेरे जीवन का अन्य कोई पल। मेरा एक ही मंत्र है और वही मंत्र लेकर मैं जीता हूं। राष्ट्र प्रथम.. इंडिया फर्स्ट।- पहले सरकार तक पहुंचना सिर्फ खास लोगों के लिए संभव होता था, आज सामान्य व्यक्ति भी सरकार से सीधे संवाद कर रहा है। आज सामान्य मानवी को विश्वास हुआ है कि मंत्री, सरकार और प्रधानमंत्री तक उसकी पहुंच है। इसी तरह पद्म पुरस्कार की कहानी है। ये पुरस्कार पहले भी दिए जाते थे, लेकिन पता भी नहीं चलता था। बहुत बड़ा बदलाव हमने किया। गांव-गांव से नाम मंगाए जिसके परिणामस्वरूप 50 हजार नाम आए। किन-किन लोगों को पद्म पुरस्कार मिले हैं, ये पूरी दुनिया ने देखा है। वाराणसी की मिट्टी के लोकगायक हीरालाल यादव जी जैसे समर्पित साधकों को पुरस्कार प्राप्त करते जिसने भी देखा, उनकी आंखों में व्यवस्था परिवर्तन का अहसास देखा जा सकता था। इसी तरह महामना और अटल जी जैसे भक्तों को भारत रत्न देकर सम्मानित करने का सौभाग्य भी हम लोगों को मिला: पीएम मोदी
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– बीते पांच वर्ष ईमानदारी के प्रयास के थे। आने वाले पांच वर्ष उन प्रयासों को विस्तार देने के होंगे। बीते पांच वर्ष परिवर्तन की शुरुआत के थे। आने वाले पांच वर्ष देश की प्रतिष्ठा के होंगे। हम देश के हर हिस्से, हर वर्ग को मजबूत करने के संकल्प के साथ लगे हैं। बीते पांच वर्ष पुरुषार्थ के थे, आने वाले पांच वर्ष परिणाम के होंगे।
– पिछले 5 वर्षों में भारत में किसी शहर, किसी पवित्र स्थान या मंदिर पर कोई आतंकी हमला नहीं हो सका है। इतना बड़ा कुंभ का मेला सुख शांति के साथ देश ने अनुभव किया। आतंकवादी अब जम्मू कश्मीर के बहुत थोडे़ से दायरे में सिमट के रह गए हैं। पुलवामा में उन्होंने हमारे 40 जवानों को शहीद किया। इस हमले के बाद उसी क्षेत्र में अबतक 42 आतंकियों के ठिकाने लगाया जा चुका है। ये हमारा काम करने का तरीका है।: मोदी
– गंगा जी में मिलने वाले अनेक नालों को बंद किया जा चुका है। प्रवासी सम्मेलन के दौरान यहां आए सैकड़ों भारतवंशियों ने गंगाजल से जैसे आचमन किया, उससे साफ है कि गंगा की सफाई को लेकर अब सारे सवाल धुल रहे हैं: पीए
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– सही कहूं तो 17 मई 2014 को गंगा तट पर कुछ संकल्प मैं ले रहा था तो मन में ये सवाल जरूर था कि काशी की उम्मीद पर खरा उतर पाउंगा क्या: लेकिन आज मैं कह सकता हूं कि हम सभी के सामूहिक प्रयास और बाबा के आशीर्वाद से काशी के बदलाव को काशीवासियों समेत पूरा देश अनुभव कर रहा है: पीएम
– जब मैं बहुत पहले काशी आया था तो उस समय एयरपोर्ट से शहर तक आने वाले रास्ते को देखकर बहुत पीड़ा हुई थी। शहर में पहुंचा तो बार-बार बिजली के लटकते तारों से सामना हुआ। मन में विचार उठा यहां गंदगी के ढरे क्यों हैं: पीएम
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– जो सपना मन में है वो पूरा हो गया ऐसा मैं कभी दवा नहीं करता हूं लेकिन उस सपने को पूरा करने की दिशा में हमारा रास्ता और रफ्तार सही है ये मैं जरूर कह सकता हूं: पीएम मोदी
– काशी के विकास को लेकर हम जिस दिशा में बढ़ रहे हैं उसके तीन पहलू हैं। एक आध्यात्मिक, दूसरा व्यवहारिक और तीसरा मानवीय। ये अलग-अलग भी हैं और एक दूसरे से जुड़े भी हैं: पीएम मोदी
– काशी की जनता से पीएम ने कहा कि लोग पूछते हैं कि मोदी ने काशी में क्या बदला है। लेकिन मैं आपको बता दूं कि काशी ने मुझमें क्या बदला है। ये मेरा सौभाग्य है कि काशी कि वेद परंपरा को ज्ञान के विश्लेषण व तार्किक अनुभवों से जुड़ सका। काशी ने मुझे सिर्फ एमपी नहीं पीएम बनने का आशीर्वाद दिया। मुझे 130 करोड़ भारतीयों के विश्वास की ताकत दी। समर्थ, सम्पन्न और सुखी भारत के लिए विकास के साथ-साथ सुरक्षा अहम है। साथियो, मेरा ये मत रहा है कि परिवर्तन तभी सार्थक और स्थायी होता है, जब जन-मन बदलता है।
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