टिकट कटने पर छलका उदित राज का दर्द, फिर नाम के आगे लगाया ‘चौकीदार’

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली की उत्तर पश्चिमी सीट से वर्तमाम सांसद उदित राज (Udit Raj) का टिकट काट दिया है। उदित राज के बदले पार्टी ने सूफी सिंगर हंस राज हंस को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इस ऐलान के साथ ही सांसद उदित राज काफी नाराज हो गए हैं। उन्होंन ट्विटर पर अपने नाम के आगे से ‘चौकीदार’ हटा लिया था। लेकिन, कुछ ही समय बाद एक बार फिर उन्होंने अपने नाम के आगे ‘चौकीदार’ लगा लिया है।

I am waiting for ticket if not given to me I will do good bye to party— Dr. udit raj , MP (@Dr_Uditraj) April 23, 2019

उदित राज का छलका दर्द
मीडिया से बात करते हुए उदित राज ने कहा कि मैं समझ नहीं पा रहा कि मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ? हालांकि, उन्होंने कहा कि मुझे कुछ कारण समझ आ रहे, मसलन 2 अप्रैल 2018 को जब भारत बंद दलितों ने किया, उसका मैंने समर्थन किया, क्या मुझे उसकी सजा मिल रही है? 3 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट सीलिंग के खिलाफ रामलीला मैदान में जो हुआ, उसका मैंने समर्थन किया। क्या वो मेरी गलती थी? मैं दलितों के खिलाफ आवाज उठाता रहा, इसकी सजा मुझे मिली है।
 

Press conference https://t.co/6i5pD6u8aN— chowkidar Dr. Udit Raj, MP (@Dr_Uditraj) April 23, 2019

पार्टी छोड़ने की दी है धमकी
भाजपा ने दिल्ली की सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। लेकिन, उदित राज के नाम पर संशय बना हुआ था। आखिरी वक्त में भाजपा ने उत्तर पश्चिमी सीट से हंस राज हंस को अपना उम्मीदवार घोषित किया। गौरतलब है कि दिल्ली में नामांकन के लिए मंगलवार आखिरी दिन है। इससे पहले सुबह से ही उदित राज ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। उन्होंने ट्विटर पर धमकी दी थी कि अगर अगर उनका टिकट कटा तो वह पार्टी छोड़ देंगे।
 

मेरे टिकट का नाम देरी होने पर पूरे देश में मेरे दलित समर्थकों में रोष है और जब मेरी बात पार्टी नहीं सुन रही तो आम दलित कैसे इंसाफ पायेगा।— Dr. Udit Raj, MP (@Dr_Uditraj) April 23, 2019

दलित नेता हैं उदित राज
उन्होंने यहां तक कहा था कि मेरे टिकट का नाम देरी होने पर पूरे देश में मेरे दलित समर्थकों में रोष है और जब मेरी बात पार्टी नहीं सुन रही तो आम दलित कैसे इंसाफ पाएगा। हालांकि, उदित राज ने यह साफ नहीं किया है कि वह किस पार्टी में जाएंगे। अब देखना यह है कि सच में उदित राज भाजपा छोड़कर किसी और पार्टी का दामन थामते हैं या कुछ और निर्णय लेते हैं।