जेडीयू और शिवसेना का अस्तित्व खत्म करेगा बीजेपी का बहुमत!

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के परिणा में अब लगभग तय हो गया है कि एक बार फिर नरेंद्र मोदी अपने नेतृत्व में सरकार बनाने जा रहे हैं। इन परिणामों में जो खास बात निकलकर सामने आई है वो बीजेपी का पूर्ण बहुमत के साथ 2014 के मुकाबले ज्यादा सीटें आना। जिसका खामियाजा हृष्ठ्र के दो प्रमुख घटक दलों को नुकसान हो सकता है। नितीश कुमार की जेडीयू और उद्घव ठाकरे की शिवसेना अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी वो फायदा मिलता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है जो बीजेपी की कम सीट आने पर मिलता। इन नतीजों के बाद संभावना बढ़ गई है कि 2020 में दोनों राज्यों में बीजेपी बड़ा फायदा लेने के लिए अकेने ना चुनाव लड़े। अगर ऐसा होता है कि दोनों राज्यों की इन पार्टियों के अस्तित्व पर खतरा बढ़ जाएगा।लोकसभा चुनाव में कुछ हुआ सीटों का बंटवारा अगर बात सीटों के बंटवारे की बात करें तो बिहार और महाराष्ट्र में बीजेपी ने बराबरी आंकड़ा रखा था। पहले बात बिहार की करें तो कुल 40 लोकसभा सीटों में 17-17 सीटों को जेडीयू और बीजेपी ने अपने पास रखा। वहीं बाकी 6 सीटों लोक जनशक्ति पार्टी दे दिया। वहीं बात महाराष्ट्र में शिवसेना और बीजेपी ने कुल 48 लोकसभा सीटों को बंटवारा आपस में किया। जिसमें बड़ी पार्टी होने के नाते 25 सीटों को बीजेपी ने आने पाले में डाला और 23 सीटों को शिवसेना के पाले में डाल दिया।बीजेपी का बिहार में शानदार प्रदर्शन 2014 की तरह इस बार भी बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है। पिछली बार बीजेपी ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था। जिनमें से बीजेपी ने मोदी लहर में 22 सीटों पर दर्ज की थी। इस बार गठबंधन में भाजपा के खाते में 17 सीटे आई। जिनमें से 16 पर जीत का परचम लहरा रहे हैं। यानी पिछली बार के मुकाबले जीत का प्रतिशत भाजपा का बढ़ा है। माना यह भी जा रहा है कि जेडीयू जिन 17 में 15 सीटों पर जीत हासिल कर रही है वो भी पीएम नरेंद्र मोदी की सुनामी का ही कमाल है। जबकि 2014 में जेडीयू ने 38 सीटों में से 2 पर ही जीत हासिल की थी।महाराष्ट्र में इस बार भी शानदार नतीजे बात महाराष्ट्र की करें तो इस बार भी शिवसेना और बीजेपी का गठबंधन शानदार प्रदर्शन कर रहा है। 48 लोकसभा सीटों में मौजूदा समय में बीजेपी और शिवसेना दोनों 21-21 सीटों से आगे चल रही है। संभावना है कि यह आंकडा और भी बढ़ सकता है। 2014 के चुनावों में पिछली बार इस गठबंधन 41 सीटें जीती थी। जिनमें से 23 सीटें बीजेपी और 18 शिवसेना के हाथों में थी। उस वक्त भी मोदी लहर में बीजेपी के साथ-साथ शिवसेना के प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई थी। इस बार भी मोदी सुनामी ने नैया पार लगाते हुए नजर आ रहे हैं।2015 बिहार विधानसभा चुनावों में बीजेपी की स्थिति अगर बात बिहार विधानसभा चुनावों की बात करें उस समय आरजेडी कांग्रेस और जेडीयू ने मिलकर चुनाव लड़ा था। इस महागठबंन में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी उभरी थी। वहीं जेडीयू को मात्र 71 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। वहीं भाजपा को 53 सीटें मिली। बाद में नितीश ने महागठबंधन से पल्ला झाड़ बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया था। लेकिन उसके बाद से बीजेपी ने अपनी स्थिति को और मजबूत करने का काम किया है।2015 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव वहीं बात महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी थी। बहुमत ना मिलने की वजह से शिवसेना का सहारा लेना पड़ा था। शिवसेना के 63 विधायकों का साथ मिला तो महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार बनी। उस वक्त बीजेपी को 122 सीटें मिली थी। इन पांच सालों में बीजेपी ने महाराष्ट्र में अपने जनाधार और संगठन में पकड़ मजबूत की है। ऐसे में महाराष्ट्र में बीजेपी के लिए संभावनाएं और भी ज्यादा सुनहरी हो गई हैं।
2020 में अकेले अपने दम पर लड़ सकती है चुनाव 2020 में बिहार और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। जिस तरह से पिछले पांच सालों में बीजेपी का प्रदर्शन लोकसभा और विधानसभा में रहा है उससे यही माना जा रहा है कि 2020 में भाजपा अपने दम चुनाव लड़ सकती है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो विधानसभा चुनावों में बीजेपी को अब किसी के साथ की जरुरत नहीं है। अगर ऐसा होता है कि दोनों राज्यों में बीजेपी अपने दम पर सरकार बना सकती है। दोनों में राज्यों में बीजेपी के जनाधार में जबरदस्त इजाफा हुआ है। यही कारण है कि अब कहा जा रहा है कि बीजेपी को शिवसेना और जेडीयू के साथ की कोई जरुरत नहीं है।
ऐसे में दोनों पार्टियों का अस्तित्व हो जाएगा खत्म बिहार और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में बीजेपी शिवसेना और जेडीयू का साथ छोड़कर अकेले चुनाव लड़ती है। संभावना है कि दोनों पार्टियों का अस्तित्व ही खतरे में ना पड़ जाए। क्योंकि जेडीयू और शिवसेना को जो इस लोकसभा में फायदा हुआ है वो बीजेपी और नरेंद्र मोदी की वजह से हुआ है। राजनीतिक पंडितों का यह भी कहना है कि अगर राज्यों में गठबंधन की सरकारों का लिहाज ना कर बीजेपी दोनों राज्यों में लोकसभा चुनाव अकेले अपने दम पर लड़ती तो बीजेपी की कुल सीटों में और इजाफा होता।