जम्मू कश्मीर में टला विधानसभा चुनाव, EC ने कहा- राज्य में सुरक्षा हालात अभी ठीक नहीं

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने आज 17वीं लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। आयोग ने इसके साथ ही चार राज्यों के विधानसभा चुनावों का शेड्यूल भी जारी किया है। इसमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम विधानसभा के चुनाव शामिल हैं। कयास लगाए जा रहे थे कि जम्मू-कश्मीर में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव भी होंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आयोग ने इसके पीछे सुरक्षा बंदोबस्त का हवाला दिया है।
5 चरण में 6 सीटों पर होगी वोटिंग
सुनील अरोड़ा ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए अभी वहां सिर्फ लोकसभा चुनाव कराने का फैसला लिया गया है। विधानसभा चुनाव इन चुनावों के साथ नहीं कराए जाएंगे। राज्य की सभी छह लोकसभा सीटों के लिए चुनाव चार चरणों में 11 अप्रैल, 18 अप्रैल, 23 अप्रैल, 29 अप्रैल और 6 मई को कराए जाएंगे। यहां सकुशल चुनाव के लिए चार विशेष पर्यवेक्षकों की नियुक्ति भी की गई है।
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#LokSabhaElections2019: Polling to be held in #JammuAndKashmir in five phases on 11th April, 18th April, 23rd April, 29th April and 6th May.— ANI (@ANI) March 10, 2019

आयोग ने बताया- क्यों नहीं साथ करा रहे वोटिंग
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि राज्य में हाल की हिंसा की घटनाओं और उम्मीदवारों की सुरक्षा पर विचार किया गया। यह महसूस किया गया कि वहां केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की पर्याप्त संख्या में तैनाती करने में मुश्किल होगी, इसलिए अभी सिर्फ लोकसभा चुनाव कराने का फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय और राज्य प्रशासन ने राज्य में चुनाव कराए जाने के लिए विशेष सूचनाएं भेजी थीं। आयोग ने राज्य में विधानसभा चुनाव नहीं कराने का फैसला गृह मंत्रालय, केंद्र और राज्य की विभिन्न एजेंसियों से विचार-विमर्श करने के बाद लिया है। आयोग की टीम खुद राज्य के दौरे पर गई थी, जहां उसने विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ बातचीत की और स्थिति और चुनाव तैयारियों का जायजा लिया।
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‘फेल हो गई मोदी सरकार’
नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने कहा है कि लोकसभा चुनाव के साथ जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव नहीं कराना मोदी सरकार की विफलता है। एनसी उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव नहीं करा कर वैश्विक मंच पर अपनी विफलता स्वीकार कर ली है। कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनाव नहीं कराने से उसकी असली मंशा का पता लग गया है।