चुनाव नतीजों से ठीक पहले कन्हैया कुमार ने किया फेसबुक पोस्ट, जिनसे बात बंद है उन्हें आज फोन करें…

नई दिल्ली। इस बार का लोकसभा चुनाव नए मुद्दों और नेताओं को लेकर चर्चा में रहा। जिन नेताओं ने इस चुनाव में सुर्खियां बंटोरी उनमें से एक रहे सीपीआई यानी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले कन्हैया कुमार। जी हां जेएनयू स्टार कन्हैया कुमार ने इस बार लोकसभा चुनाव में ताल ठोंक कर सभी चौंका दिया। जमकर प्रचार और फिर मतदान के बाद अब वक्त आ गया है नतीजों। लिहाजा कन्हैया कुमार ने ठीक एक दिन पहले समर्थकों के लिए एक खास संदेश लिखकर फिर सुर्खियां बंटोरी हैं।
कन्हैया कुमार की भावुक अपील बेगूसराय सीट से गिरिराज सिंह के खिलाफ ताल ठोंक रहे कन्हैयार कुमार ने जनता से सोशल मीडिया के जरिये अपील की है। कन्हैया ने फेसबुक पर पोस्ट में लिखा है कि ‘कल चुनाव में चाहे कोई जीते, हमें इसका ध्यान रखना होगा कि आने वाले समय में समाज में नफरत की हर हाल में हार हो। पिछले पांच साल में मतभेद को जिस तरह ‘मन भेद’ बनाया गया है, उसने न केवल लोकतंत्र को कमजोर किया है बल्कि समाज को नफरत की आग में झोंकने का काम किया है। नेताओं के चक्कर में आपस में लड़ने वालों को ठंडे दिमाग से सोचने की जरूरत है कि ऐसा करने से किनका फायदा होता है और किनका नुकसान। असहमित को अपराध या अपमान मानने की मानसिकता न केवल लोकतंत्र को कमजोर बनाती है, बल्कि रिश्तों में भी जहर घोलती है। लोकतांत्रिक होने का मतलब है अहसमति को सम्मान देना और यह बात चुनाव या राजनीत से आगे जाती है।
 

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कन्हैया की इस भावुक अपील में देश के हर वर्ग का जिक्र भी दिखा। कन्हैया ने किसान से लेकर दलित और मजदूरों के साथ पिछड़ी जाति के लोगों को लेकर बनाई जाने वाली नीतियों के असर पर भी प्रकाश डाला। बकौल कन्हैया जो देश बनाते हैं वहीं नीतियां भी बनाते हैं अगर उनकी नीतियों कमजोरों को लेकर गलत बनीं तो इसका सीधा असर पूरे देश पर दिखाई देता है। कन्हैया ने कहा कि इस तरह की नीतियों का विरोध करना देश प्रेम है न कि पीएम, सीएम या सांसद के विरोध को देश का विरोध मानकर सड़कों पर हिंसा करना। जिन्होंने देशप्रेम को नेताप्रेम बना दिया है, उनसे सावधान रहने की जरूरत है। वे अपने फायदे के लिए आपके रिश्तों में भी जहर घोल रहे हैं।’
जिनसे बात बंद है उन्हें आज फोन करेंकन्हैया ने अपने पोस्ट में दिलचस्प बात भी लिखी। उन्होने लिखा कि ‘जिस दोस्त, पड़ोसी या रिश्तेदार से राजनीतिक बहस के कारण आपकी बातचीत बंद हो गई है, उसे आज फोन करें, उसके परिवार का हाल-चाल पूछें और बताएं कि उनसे आपका रिश्ता इतना कमजोर नहीं कि वह ऐसी बातों से टूट जाएगा। असहमतियों का सम्मान करना ही लोकतंत्र की खूबसूरती है। ‘हम भारत के लोग’ किसी भी तरह की नफरत को अपने दिल से मिटा देंगे, तो समाज और राजनीति में भी नफरतवादी ताकतें अपने आप हारने लगेंगी।’