एग्जिट पोल के बाद MP से कांग्रेस को ‘EXIT’ करने की तैयारी! समझें विधानसभा की मैथमेटिक्स

भोपाल। लोकसभा चुनाव 2019 के एग्जिट पोल के नतीजों को देखा जाए तो केन्द्र में एक बार फिर मोदी सरकार आ रही है। इस बीच मध्य प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। मध्य प्रदेश भाजपा ने यहां की कमलनाथ सरकार के अल्पमत में होने का दावा किया है और राज्यपाल से विधानसभा से सत्र बुलाने की मांग की है।
दरअसल, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता ने गोपाल भार्गव ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक्जिट पोल के नतीजे बता रहे हैं कमलनाथ सरकार यहां की जनता का विश्वास खो दिया है। इसलिए विधानसभा में सरकार की शक्ति परीक्षण हो जाए।
ऐसा नहीं है कि भाजपा की ओर से सरकार बनाने की बात पहली बार कही कई हो। लोकसभा चुनाव से पहले भी भाजपा नेताओं ने दावा किया था कि अगर एक बार फिर से केन्द्र में मोदी की सरकार आती है तो कमलनाथ की सरकार गिर जाएगी।
कैलाश विजयवर्गीय ने यहां तक कह दिया था कि अगर ‘ऊपर’ से आदेश मिल जाए तो कमलनाथ की सरकार उसी दिन गिर जाएगी। कैलाश विजयवर्गीय ने सोमवार को एक न्यूज चैनल से बात करते हुए दावा किया कि मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार की उलटी गिनती शुरू हो गई है। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद कमलनाथ 22 दिन तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहेंगे या नहीं, यह बड़ा सवाल है।
इधर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने दावा किया कि कमलनाथ की सरकार वैसाखी पर चल रही है। वह अपने आंतरिक संघर्षों के कारण गिर जाएगी। आगे उन्होंने कहा कि फिलहाल हम केंद्र में सरकार बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

Rakesh Singh, BJP: Their govt(MP)won’t go on. Theirs is minority govt standing on crutches. It’ll collapse due to its internal conflicts. But today we’re focussing on elections results&forming govt at centre. Today we aren’t discussing whose govt will be or won’t be there in MP. pic.twitter.com/jQgNSHFIft— ANI (@ANI) May 20, 2019

क्या है एमपी विधानसभा की मैथमेटिक्स
मध्यप्रदेश में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं। 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सबसे अधिक सीटें मिली थी। कांग्रेस को कुल 114 सीटें मिली थीं जबकि बहुमत के लिए 116 सीट चाहिए। वहीं भाजपा को 109 सीट मिली थीं। इसके अलवा 4 निर्दलीय को, बसपा को दो और सपा को एक सीट मिली थी। कमलनाथ सरकार को निर्दलीय, बसपा और सपा विधायकों का समर्थन मिला हुआ है। हालांकि कई बार बसपा और सपा विधायकों की नाराजगी भी सामने आयी है, जिसे बाद में कमलनाथ ने दूर भी कर दिया था।