नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण का प्रचार मंगलवार शाम को थम गया लेकिन हेट स्पीच देकर वोट वटोरने वाले नेताओं के खिलाफ चुनाव आयोग ने पहली बार नोटिस जारी करने की अपनी परंपरा से दो कदम आगे बढ़कर उनके खिलाफ कार्रवाई की है। आयोग के इस रुख के बाद यह लगने लगा था कि अब हेट स्पीच देने वाले नेता ऐसा करने से बाज आएंगे। पर ऐसा नहीं हुआ, धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगने का सिलसिला दूसरे चरण में प्रचार के अंतिम दिन भी जारी रहा। तो क्या यह मान लें कि चुनाव आचार संहिता (ईसीसी) का खौफ नेताओं को नहीं है?
अभी तक इन नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई
जाति और धर्म के आधार पर वोट देने की बात करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग (ईसी) नाराजगी जताई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीएसपी सुप्रीमो मायावती, सपा नेता आजम खान और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के खिलाफ हेट स्‍पीच के मामले में कार्रवाई की है। इन नेताओं के चुनाव प्रचार पर 48 से 72 घंटे तक के लिए ईसी ने प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बावजूद हेट स्‍पीच का मामला थमा नहीं है। सोमवार को फतेजपुर सीकरी से बसपा प्रत्याशी गुड़डू पंडित और मंगलवार को कटिहार में पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने भी हेट स्पीच दिया। दोनों के खिलाफ चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है और एक से दो दिन में दोनों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना ज्‍यादा है।
तो क्‍या दंतहीन शेर है ईसी?
दरअसल, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि सीमित शक्तियां होने के कारण हेट स्पीच पर लगाना संभव नहीं है। ईसी ने शीर्ष अदालत को स्पष्ट किया था कि उसके पास हेट स्‍पीचर्स की उम्मीदवारी रद्द करने का भी कानूनी अधिकार नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयोग अनुच्‍छेद 324 के तहत जरूरी कार्रवाई कर सकता है। उसके बाद चुनाव आयोग ने अनुच्‍छेद 324 व अन्‍य धाराओं को प्रयोग करते हुए सीएम योगी, बसपा प्रमुख मायावती, सपा नेता आजम खान और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को हेट स्‍पीच का दोषी करार देते हुए उनके प्रचार पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया।
सरकार की मंजूरी जरूरी
धारा 153ए के तहत कोई शख्स अगर धार्मिक आधार पर लोगों को भड़काने या किसी गैर कानूनी काम के लिए प्रेरित करता है या पूर्वाग्रहों के आधार पर सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सजा का प्रावधान है। इसके तहत अधिकतम तीन साल तक की सजा हो सकती है लेकिन इसके लिए सरकार की मंजूरी आवश्यक है। मंजूरी न मिलने की वजह से चुनाव आयोग कार्रवाई नहीं कर पाता है।
क्या है अनुच्छेद 324?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 से अनुच्छेद 329 तक निर्वाचन की व्यवस्था है। अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार निर्वाचन आयोग के पास है। इस अनुच्छेद के तहत चुनाव आयोग को चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी संविधान से मिली हुई है। इसी अनुच्छेद का लाभ उठाते हुए पूर्व चुनाव आयुक्त टीएन शेषण ने भारतीय चुनाव आयोग को एक शक्तिशाली संगठन बनाया और बहुत हद तक बूथ कैप्चरिंग सहित चुनाव में धन और बाहुबल पर रोक लगाने में कामयाबी हासिल की थी। सोमवार को एक याचिकाकर्ता की रिट सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को संकेत दिया था कि अनुच्छेद 324 में चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्षतापूर्व और भेदभाव कराने के लिए जरूरी कदम उठाने की जिम्मेदारी ईसी की है।