पणजी। गोवा में मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद मचे सियासी घमासान के बीच भाजपा ने फिर से बाजी मारते हुए सरकार बना लिया है। भाजपा की ओर से प्रमोद सावंत गोवा के नए मुख्यमंत्री होंगे। लेकिन इन सबके बीच सरकार बनाने का दावा पेश करने वाली कांग्रेस ने इसका विरोध किया है। गोवा कांग्रेस के नेता सुनील कावथांकर ने भाजपा की ओर से सरकार बनाने के किए गए प्रयास की निंदा की है और इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण देकर लोकतंत्र की हत्या की है। उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की है कि भेदभाव तरीके से व्यवहार करने वाली राज्यपाल मृदुला सिन्हा को बर्खास्त किया जाए और फौरन कांग्रेस पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए। सुनील ने आरोप लगाया कि राज्यपाल भाजपा की एजेंट की तरह काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में यह एक काला दिन के तौर पर याद किया जाएगा, जब सीएम पर्रिकर के निधन की खबर आने के बाद भी 24 घंटे के लिए राज्य में कोई सरकार नहीं था। जबकि कांग्रेस ने सरकार बनाने का दावा भी किया था। इसके बावजूद भी कांग्रेस को आमंत्रित नहीं किया गया। बता दें कि इससे पहले कांग्रेस ने राज्यपाल मृदुला सिन्हा को पत्र लिखकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था।

Sunil Kawthankar, Goa Congress: We strongly condemn this deliberate murder of democracy by Governor of Goa and demand the President to dismiss the biased Governor Mridula Sinha and invite Congress party to form the Government immediately.— ANI (@ANI) March 18, 2019

प्रमोद सावंत बने गोवा के नए सीएम
बता दें कि भाजपा के प्रमोद सावंत गोवा के नए मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। इससे पहले वे गोवा विधानसभा के अध्यक्ष थे। भाजपा ने सरकार बनाने के लिए क्षेत्रीय सहयोगी दलों के साथ मिलकर नए समीकरण बनाए और फिर सरकार बनाने का दावा पेश किया। नए समीकरण के मुताबिक राज्य में दो डिप्टी सीएम होंगे। महाराष्‍ट्रवादी गोमंतक पार्टी के सुदिन धवलीकर और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के विजय सरदेसाई को उप मुख्यमंत्री बनाया गया है। बता दें कि गोवा में विधानसभा की 40 सीटें और सरकार बनाने के लिए 21 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है। लिहाजा अब भाजपा ने सभी नए समीकरण के तहत पूरा नंबर होने का दावा किया है। बता दें कि मौजूदा स्थिति में भाजपा के पास 12, एमजीपी और जीएफपी के पास तीन-तीन और निर्दलीय विधायकों की संख्या तीन है। इसके अलावे कांग्रेस के पास 14 और एनसीपी के पास एक सीट है। इसके अलावे बाकी सीटें रिक्त है।
 
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